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मनुस्मृति • अध्याय 3 • श्लोक 77
यथा वायुं समाश्रित्य वर्तन्ते सर्वजन्तवः । तथा गृहस्थमाश्रित्य वर्तन्ते सर्व आश्रमाः ॥
जिस प्रकार सभी प्राणी वायु के सहारे जीवित रहते हैं, उसी प्रकार अन्य राज्य भी गृहस्थ के आश्रय से निर्वाह करते हैं।
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