(1) जप 'अहुत' है, (2) अग्नि में आहुति देना 'हुत' है, (3) तत्वों को अर्पित करना 'प्रहुत' है, (4) ब्राह्मणों का सम्मान 'ब्रह्म्य-हुत' है, और (5) जल -पितरों को अर्पित करना 'प्रशित' है।
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