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मनुस्मृति • अध्याय 3 • श्लोक 72
देवताऽतिथिभृत्यानां पितॄणामात्मनश्च यः । न निर्वपति पञ्चानामुच्छ्वसन्न स जीवति ॥
जो देवता, अतिथि, आश्रित, पितृ और स्वयं इन पाँचों को तर्पण नहीं करता, वह श्वास लेते हुए भी जीवित नहीं रहता।
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