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मनुस्मृति • अध्याय 3 • श्लोक 47
तासामाद्याश्चतस्रस्तु निन्दितैकादशी च या । त्रयोदशी च शेषास्तु प्रशस्ता दशरात्रयः ॥
इनमें से पहले चार दिनों को पदावनत कर दिया गया है, साथ ही ग्यारहवें और तेरहवें को भी, शेष दस दिनों की सिफारिश की गई है।
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