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मनुस्मृति • अध्याय 3 • श्लोक 4
गुरुणानुमतः स्नात्वा समावृत्तो यथाविधि । उद्वहेत द्विजो भार्यां सवर्णां लक्षणान्विताम् ॥
गुरु की आज्ञा से स्नान करके तथा नियमानुसार समावर्तन (घर लौटने की क्रिया) करके द्विज को चाहिए कि वह समान जाति की स्त्री से विवाह करे, जो शुभ चिह्नों से युक्त हो।
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