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मनुस्मृति • अध्याय 3 • श्लोक 33
हत्वा छित्त्वा च भित्त्वा च क्रोशन्तीं रुदतीं गृहात् । प्रसह्य कन्याहरणं राक्षसो विधिरुच्यते ॥
मार - पीट कर, घायल करके और छेद कर रोती - चिल्लाती हुई कन्या को घर से जबरन उठा ले जाना - राक्षस रूप कहलाता है।
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