जब तक मृत्यु न हो तब तक पितरों के सम्मान में अनुष्ठान के अनुसार दाहिने कंधे के ऊपर से गुजरते हुए पवित्र सूत के साथ 'बाएं से' (दाईं ओर) अपने हाथ में कुश-घास के साथ अनुष्ठान करना चाहिए।
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