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मनुस्मृति • अध्याय 3 • श्लोक 277
युक्षु कुर्वन् दिनर्क्षेषु सर्वान् कामान् समश्नुते । अयुक्षु तु पितॄन् सर्वान् प्रजां प्राप्नोति पुष्कलाम् ॥
सम तिथियों पर और सम नक्षत्रों के तहत (श्राद्ध) करने से व्यक्ति सभी इच्छाओं को प्राप्त करता है; और विषम पर पितरों का आदर करने से उसे समृद्ध संतान की प्राप्ति होती है।
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