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मनुस्मृति • अध्याय 3 • श्लोक 274
अपि नः स कुले भूयाद् यो नो दद्यात् त्रयोदशीम् । पायसं मधुसर्पिर्भ्यां प्राक् छाये कुञ्जरस्य च ॥
हमारे परिवार में कोई ऐसा हो जो तेरहवीं को और पूर्व दिशा में हाथी की छाया पड़ने पर शहद और मक्खन मिश्रित दूध-चावल अर्पित करे।
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