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मनुस्मृति • अध्याय 3 • श्लोक 273
यत् किं चिन् मधुना मिश्रं प्रदद्यात् तु त्रयोदशीम् । तदप्यक्षयमेव स्याद् वर्षासु च मघासु च ॥
मास के तेरहवें दिन वर्षा के समय माघा नक्षत्र में जो कुछ भी शहद मिलाकर चढ़ाया जाता है, वह भी अविनाशी होता है।
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