यत् किं चिन् मधुना मिश्रं प्रदद्यात् तु त्रयोदशीम् ।
तदप्यक्षयमेव स्याद् वर्षासु च मघासु च ॥
मास के तेरहवें दिन वर्षा के समय माघा नक्षत्र में जो कुछ भी शहद मिलाकर चढ़ाया जाता है, वह भी अविनाशी होता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।