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मनुस्मृति • अध्याय 3 • श्लोक 267
तिलैर्व्रीहियवैर्माषैरद्भिर्मूलफलेन वा । दत्तेन मासं तृप्यन्ति विधिवत् पितरो नृणाम् ॥
तिल, चावल और जौ, मास, जल, जड़ और फल की विधिपूर्वक तर्पण करने से मनुष्य के पितर एक मास तक तृप्त होते हैं।
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