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मनुस्मृति • अध्याय 3 • श्लोक 257
मुन्यन्नानि पयः सोमो मांसं यच्चानुपस्कृतम् । अक्सारलवणं चैव प्रकृत्या हविरुच्यते ॥
मुनियों का भोजन, दूध, सोम जड़ी, अनुमत मांस, क्षार के अलावा अन्य नमक स्वभाव से "यज्ञ भोजन" कहलाते हैं।
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