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मनुस्मृति • अध्याय 3 • श्लोक 250
श्राद्धभुग् वृषलीतल्पं तदहर्योऽधिगच्छति । तस्याः पुरीषे तं मासं पितरस्तस्य शेरते ॥
श्राद्ध में भोजन करके यदि कोई उस दिन स्त्री की शय्या में प्रवेश करता है, तो उसके पितर उस पूरे मास में उसके गर्भगृह में पड़े रहते हैं।
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