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मनुस्मृति • अध्याय 3 • श्लोक 22
यो यस्य धर्म्यो वर्णस्य गुणदोषौ च यस्य यौ । तद् वः सर्वं प्रवक्ष्यामि प्रसवे च गुणागुणान् ॥
इनमें से कौन किस जाति के लिए उचित है, प्रत्येक के अच्छे और बुरे गुण क्या हैं, संतान पर प्रत्येक के अच्छे और बुरे प्रभाव - यह सब मैं आपको समझाऊंगा।
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