राजतैर्भाजनैरेषामथो वा रजतान्वितैः ।
वार्यपि श्रद्धया दत्तमक्षयायौपकल्पते ॥
चाँदी के पात्र में या चाँदी के बर्तन में श्रद्धापूर्वक अर्पित किया हुआ जल भी अविनाशी होता है।
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