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मनुस्मृति • अध्याय 3 • श्लोक 199
अग्निदग्धानग्निदग्धान् काव्यान् बर्हिषदस्तथा । अग्निष्वात्तांश्च सौम्यांश्च विप्राणामेव निर्दिशेत् ॥
अनग्निदग्ध, अग्निदग्ध, काव्य, बर्हिषद, अग्निश्वत्त और सौम्य - इन्हें ब्राह्मणों के पितर मानना चाहिए।
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