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मनुस्मृति • अध्याय 3 • श्लोक 172
परिवित्तिः परिवेत्ता यया च परिविद्यते । सर्वे ते नरकं यान्ति दातृयाजकपञ्चमाः ॥
पराश्रित ज्येष्ठ भाई, पराक्रमी छोटा भाई और वह जिसके द्वारा अधिष्ठापन किया जाता है - ये सब दाता और पाँचवे पुरोहित के साथ नरक में जाते हैं।
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