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मनुस्मृति • अध्याय 3 • श्लोक 142
यथैरिणे बीजमुप्त्वा न वप्ता लभते फलम् । तथाऽनृचे हविर्दत्त्वा न दाता लभते फलम् ॥
जिस प्रकार बंजर भूमि में बीज बोने से बोने वाला फसल नहीं काटता - उसी प्रकार, वेद के अज्ञानी को प्रसाद देने से, देने वाले को कोई पुरस्कार नहीं मिलता है।
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