न श्राद्धे भोजयेन् मित्रं धनैः कार्योऽस्य सङ्ग्रहः ।
नारिं न मित्रं यं विद्यात् तं श्राद्धे भोजयेद् द्विजम् ॥
श्राद्ध में मित्र को भोजन नहीं कराना चाहिए; उसका अधिग्रहण धन के माध्यम से किया जाएगा। श्राद्ध में उसे भोजन कराना चाहिए जिसे वह न मित्र मानता है और न शत्रु।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।