एक ब्राह्मण किसी के घर में असम्मानित रहने से उसका सारा पुण्य हर लेता है, भले ही वह एक हो जो फसल की बूंदों को इकट्ठा करके निर्वाह करता है, या पाँच अग्नियों में आहुति देता है।
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