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मनुस्मृति • अध्याय 2 • श्लोक 99
इन्द्रियाणां तु सर्वेषां यद्येकं क्षरतीन्द्रियम् । तेनास्य क्षरति प्रज्ञा दृतेः पादादिवोदकम् ॥
यदि सब अंगों में से कोई निकल जाए, तो उसकी बुद्धि उसी प्रकार बाहर निकल जाती है, जैसे चमड़े की थैली के एक भाग से जल।
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