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मनुस्मृति • अध्याय 2 • श्लोक 93
इन्द्रियाणां प्रसङ्गेन दोषं ऋच्छत्यसंशयम् । संनियम्य तु तान्येव ततः सिद्धिं निगच्छति ॥
इन्द्रियों के प्रति आसक्ति से मनुष्य पाप को प्राप्त होता है, इसमें कोई सन्देह नहीं; जबकि उन्हीं को वश में कर सफलता प्राप्त करता है।
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