वेद के आरंभ में और अंत में हमेशा प्रणव का उच्चारण करना चाहिए। यदि इसके साथ प्रारंभ में 'ॐ' अक्षर नहीं है, तो यह छलक कर दूर चला जाता है; और (यदि साथ न हो तो) अन्त में चकनाचूर हो जाता है।
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