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मनुस्मृति • अध्याय 2 • श्लोक 5
तेषु सम्यग् वर्तमानो गच्छत्यमरलोकताम् । यथा सङ्कल्पितांश्चैह सर्वान् कामान् समश्नुते ॥
इन (इच्छाओं) के सम्बन्ध में उचित आचरण करने पर मनुष्य अमर पद को प्राप्त होता है और इस लोक में भी उसे वह सब इच्छाएँ प्राप्त हो जाती हैं जो उसने सोची होंगी।
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