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मनुस्मृति • अध्याय 2 • श्लोक 49
भवत्पूर्वं चरेद् भैक्षमुपनीतो द्विजोत्तमः । भवन्मध्यं तु राजन्यो वैश्यस्तु भवदुत्तरम् ॥
दीक्षा लेने वाले ब्राह्मण को चाहिए कि जिस शब्द से 'भवत' प्रारम्भ करे, क्षत्रिय जिसके शब्दों से 'भवत' मध्य हो और वैश्य जिसके शब्दों से 'भवत' का अंत हो, उससे भोजन की याचना करे।
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