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मनुस्मृति • अध्याय 2 • श्लोक 47
ऋजवस्ते तु सर्वे स्युरव्रणाः सौम्यदर्शनाः । अनुद्वेगकरा नॄणां सत्वचोऽनग्निदूषिताः ॥
ये सभी सीधे, अक्षुण्ण, सुंदर दिखने वाले, पुरुषों के लिए भयावह नहीं, काले और आग से अछूते होने चाहिए।
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