आ षोदशाद् ब्राह्मणस्य सावित्री नातिवर्तते ।
आ द्वाविंशात् क्षत्रबन्धोरा चतुर्विंशतेर्विशः ॥
ब्राह्मण के लिए सावित्री सोलहवें वर्ष तक व्यपगत नहीं होती; क्षत्रिय के लिए बाइसवें वर्ष तक; और वैश्य के लिए चौबीसवें वर्ष तक।
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