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मनुस्मृति • अध्याय 2 • श्लोक 36
गर्भाष्टमेऽब्दे कुर्वीत ब्राह्मणस्यौपनायनम् । गर्भादेकादशे राज्ञो गर्भात् तु द्वादशे विशः ॥
गर्भाधान से आठवें वर्ष में ब्राह्मण की दीक्षा करनी चाहिए; गर्भधारण से ग्यारहवें वर्ष में राजा की; और वैश्य की बारहवीं में।
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