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मनुस्मृति • अध्याय 2 • श्लोक 31
मङ्गल्यं ब्राह्मणस्य स्यात् क्षत्रियस्य बलान्वितम् । वैश्यस्य धनसंयुक्तं शूद्रस्य तु जुगुप्सितम् ॥
ब्राह्मण का नाम शुभ, शक्ति से जुड़े क्षत्रिय का, धन से जुड़े वैश्य का और शूद्र का तिरस्कृत होना चाहिए।
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