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मनुस्मृति • अध्याय 2 • श्लोक 230
त एव हि त्रयो लोकास्त एव त्रय आश्रमाः । त एव हि त्रयो वेदास्त एवौक्तास्त्रयोऽग्नयः ॥
इन्हें ही तीन लोक, ये तीन जीवन अवस्थाएं, ये तीन वेद और ये तीन अग्नियां बताई गई हैं।
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