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मनुस्मृति • अध्याय 2 • श्लोक 195
प्रतिश्रावणसम्भाषे शयानो न समाचरेत् । नासीनो न च भुञ्जानो न तिष्ठन्न पराङ्मुखः ॥
उसे लेटे हुए (अपने शिक्षक) की बात नहीं सुननी चाहिए और उसके साथ बातचीत नहीं करनी चाहिए; न बैठे हुए, न खाते समय, न खड़े होकर, न मुंह फेरकर।
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