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मनुस्मृति • अध्याय 2 • श्लोक 158
यथा षण्ढोऽफलः स्त्रीषु यथा गौर्गवि चाफला । यथा चाज्ञेऽफलं दानं तथा विप्रोऽनृचोऽफलः ॥
जैसे स्त्रियों में नपुंसक बेकार है, गायों में गाय बेकार है, अज्ञानी को दिया गया दान बेकार है, वैसे ही वेद से रहित ब्राह्मण बेकार है।
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