उपाध्यायान् दशाचार्य आचार्याणां शतं पिता ।
सहस्रं तु पितॄन् माता गौरवेणातिरिच्यते ॥
उपाध्याय से दस गुना अधिक पूजनीय गुरु होता है, गुरु से सौ गुना अधिक पिता और पिता से हजार गुना अधिक माता होती है।
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