चातुर्वर्ण्य त्रयो लोकाश्चत्वारश्चाश्रमाः पृथक् ।
भूतं भवत् भविष्यं च सर्व वेदात्मसिध्यति ।।
पृथक्-पृथक चारों वर्ण (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र), तीनों लोक (स्वर्ग, मृत्यु और पाताल), चारों आश्रम (ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यास) और भूत, भविष्य तथा वर्तमान (क्रमशः जो कुछ हुआ होगा तथा हो रहा है) वह सब वेद से ही प्रसिद्ध होते हैं।
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