उत्पद्यन्ते विनश्यन्ति यान्यतोऽन्यानि कानिचित् ।
तान्यर्वाक्कालितया निष्फलान्यनृतानि च ।।
इस (वेद) से भिन्न जो शास्त्र रचे जाते तथा नष्ट होते हैं, वे सब अर्वाचीन आधुनिक अर्थात् इस समय के (रचे हुए) होने से निष्फल तथा असत्य हैं।
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