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मनुस्मृति • अध्याय 12 • श्लोक 92
यथोक्तान्यपि कर्माणि परिहाय द्विजोत्तमः । आत्मज्ञाने शमे च स्याद्वेदाभ्यासे च यत्नवान्‌ ।।
द्विजोत्तम (ब्राह्मण) शास्त्रोक्त (अग्निहोत्रादि) कर्मो का त्यागकर भी ब्रह्मध्यान, इन्द्रियनिग्रह और (प्रणव, उपनिषद्‌ आदि) वेद के अभ्यास में प्रयत्नशील रहे।
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