सम्पूर्ण (चराचर) जीवों में आत्मा को तथा आत्मा में सम्पूर्ण (चराचर) जीवों को देखता हुआ आत्मयाजी (ब्राह्यार्पण न्याय से ज्योतिष्टोमादि करने वाला) ब्रह्मत्व अर्थात् मुक्ति को पाता है।
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