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मनुस्मृति • अध्याय 12 • श्लोक 83
वेदाभ्यासस्तपोज्ञानमिन्द्रियाणां च संयमः । अहिंसा गुरुसेवा च निःश्रेयसकरं परम्‌ ।।
(उपनिषद्‌ के सहित) वेद का अभ्यास, (प्राजापत्य आदि) तप, (ब्रह्मविषयक) ज्ञान, इन्द्रियों का संयम, अहिंसा और गुरुजनों की सेवा - ये ब्राह्मण के लिए श्रेष्ठ मोक्षसाधक छः कर्म हैं।
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