जरां चैवाप्रतीकारां व्याधिभिश्चोपपीडनम् ।
क्लेशांश्च विविधांस्तांस्तान्मृत्युमेव च दुर्जयम् ।।
(वे क्षुद्रबुद्धि पापी मनुष्य) प्रतिकार रहित बुढ़ापा, व्याधियों से उपपीडन (भूख-प्यास आदि से) अनेक प्रकार के क्लेश और दुर्जय मृत्यु को पाते हैं।
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