(वे क्षुद्रबुद्धि पापी मनुष्य) अनेक प्रकार की पीड़ाओं को भोगते हैं, उन्हें कौवे और उल्लू खाते हैं, वे सन्तप्त बालू (रेत) में सन्ताप को पाते हैं और कुम्भीपाक आदि दारुण नरकों को भोगते हैं।
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