अपने कर्म से भ्रष्ट हुआ वैश्य पीब खानेवाला 'मैत्राक्षज्योतिष्क' नामक प्रेत होता है (इसका गुद ही कर्मेन्द्रिय होता है) और अपने धर्म में भ्रष्ट शूद्र 'चैलाशक' (वस्त्रों की 'जूँ' को खानेवाला) नामक प्रेत होता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।