अदत्तानामुपादानं हिंसा चैवाविधानतः ।
परदारोपसेवा च शारीरं त्रिविधं स्मृतम् ।।
(८) बिना दी हुई (दूसरे की) वस्तु को लेना, (९) शास्र-वर्जित हिंसा करना और (१०) परस्त्री के साथ सम्भोग करना; ये तीन प्रकार के शारीरिक (अशुभ) कर्म हैं (इस प्रकार ये १० प्रकार के (अशुम) कर्म हैं)।
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