मनुष्य दूसरे की नि:सार (साधारणतम) भी वस्तु को बलात्कार से लेकर तथा बिन हवन किये (पुरोडाश आदि) हविष्य को खाकर अवश्य ही तिर्यग्योनि को पाता है।
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