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मनुस्मृति • अध्याय 12 • श्लोक 64
कौशेयं तित्तिरिर्हृत्वा क्षौमं हत्वा तु दर्दुरः । कार्पासतान्तवं क्रौञ्चो गोधा गां वाग्गुदो गुडम्‌ ।।
रेशमी वस्त्र (या सूत) चुराकर तीतर पक्षी, क्षौम (तोसी आदि के छाल से बना) वस्त्र चुराकर मण्डूक (मेढ़क), रुई से बना अर्थात्‌ सूती वस्त्र चुराकर क्रौञ्च पक्षी, गौ को चुराकर गोह और गुड़ चुराकर वाग्गुद पक्षी होता है।
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