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मनुस्मृति • अध्याय 12 • श्लोक 62
धान्यं हृत्वा भवत्याखुः कांस्यं हंसो जलं पल्वः । मधु दंशः पयः काको रसं श्वा नकुलो घृतम्‌ ।।
मनुष्य धान्य चुराकर चूहा, कांसा चुराकर हंस, जल चुराकर प्लव नामक पक्षी, शहद चुराकर दंश (डांस), दूध चुराकर कौवा, (विशिष्ट रूप से कथित गुड नमक आदि के अतिरिक्त) गन्ने आदि का रस चुराकर कुत्ता और घी चुराकर नेवला होता है।
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