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मनुस्मृति • अध्याय 12 • श्लोक 56
कृमिकीटपतङ्गानां विड्भुजां चैव पक्षिणाम्‌ । हिंस्राणां चैव सत्त्वानां सुरापो ब्राह्मणो ब्रजेत्‌ ।।
सुरा पीने वाला ब्राह्मण कृमि (बहुत सूक्ष्म कीड़े), कीट (कृमियों से कुछ बड़े कीड़े), पतङ्ग (उड़ने वाले फतिङ्गे यथा-शलभ, टिड्डी आदि), विष्ठा खाने वाले (कौआ आदि) तथा हिंसक (बाघ, सिंह, भेड़िया आदि) जीवों की योनि को प्राप्त करता है।
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