ब्रह्मा विश्वसृजो धर्मो महानव्यक्तमेव च ।
उत्तमां सात्त्विकीमेतां गतिमाहुर्मनीषिणः ।।
ब्रह्मा (चतुर्मुख) विश्वस्रष्टा (मरीच आदि), (शरीरधारी) धर्म, महान्, अव्यक्त (साङ्कयप्रसिद्ध दो तत्त्व-विशेष) - इनको विद्वान् उत्तम सात्त्विक गतियाँ कहते हैं।
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