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मनुस्मृति • अध्याय 12 • श्लोक 49
यज्वान ऋषयो देवा वेदा ज्योतींषि वत्सराः । पितरश्चैव साध्याश्च द्वितीया सात्त्विकी गतिः ।।
यज्वा (विधिपूर्वक यज्ञानुष्ठान किये हुए), ऋषि, देव, (इतिहास प्रसिद्ध शरीरधारी वेदाभिमानी देव-विशेष), ज्योति (ध्रुव आदि), वर्ष (इतिहास प्रसिद्ध शरीरधारी संवत्सर), पितर (सोमप आदि) और साध्य (देवयोनि-विशेष) - ये मध्यम सात्त्विकी गतियाँ हैं।
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