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मनुस्मृति • अध्याय 12 • श्लोक 44
चारणाश्च सुपर्णाश्च पुरुषाश्चैव दाम्भिकाः । रक्षांसि च पिशाचाश्च तामसीषूत्तमा गतिः ।।
चारण (बन्दी-भाट आदि), सुपर्ण (पक्षी-विशेष), कपटाचारी मनुष्य, राक्षस और पिशाच-ये उत्तम तामसी गतियाँ हैं।
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