(सत्त्वादि तीनों गुणों के कारण) तीन प्रकार की ये गतियाँ (देवगति, मनुष्यगति तथा तिर्यग्गति) कर्म तथा विद्या आदि की विशेषता से जघन्य, मध्यम तथा उत्तम - पुनः तीन प्रकार की अप्रधान गतियाँ होती हैं। इस प्रकार ३ x ३ = ९ अप्रधान गतियाँ होती हैं)।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।